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घरौंदा योजना

घरौंदा योजना

[su_dropcap]ऐ[/su_dropcap]से वयस्क निःशक्त जन जिनके सम्मुख जीवन पर्यंत आश्रय एवं देखरेख की समस्या हो और ऐसे अनाथ निःशक्त जन जिनके संरक्षण हेतु कोई विकल्प उपलब्ध न हो उनके लिए घरौंदा योजना लाभप्रद है जिसकी मदद से उन्हें देखभाल की पर्याप्त एवं उत्तम सेवाएँ दी जा सकेंगी । जिससे वे दयनीय स्थिति से निकाल कर सम्मान पूर्वक जीने में सक्षम हो पाएँगे ।

राज्य के प्रत्येक संभाग मुख्यालय अथवा संभाग के अंतर्गत अन्य जिला मुख्यालय में एक घरौंदा गृह संचालित किए जमे का प्रावधान है जहां अधिकतम 25 व्यक्तियों की सुविधा हो ।

योजना का उद्देश्य :

राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 में उल्लिखित निःशक्तता से पीड़ित व्यक्तियों  के जीवन भर के लिए संस्थागत आश्रय सुनिश्चित करने और देखरेख की मानक सेवाएँ प्रदान करने के उद्देश्य से घरौंदा योजना की पहल की गई है , ऐसे निःशक्त जन जो औटिज़्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और एकाधिक बहुनिःशक्तता से ग्रस्त हों वे सभी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे

निःशक्तजनों को स्वावलंबन में सहायता उपलब्ध कराना ।

स्वास्थ्यगत दैनिक क्रियाकलापों सहित शैक्षणिक एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध करना ।

परिवार एवं समाज में इस समुदाय की स्वीकारिता को प्रोत्साहित और बढ़ावा देने के लिए जागरूकता सृजन, प्रारंभिक पहचान और हस्तक्षेप के साथ ही इस निःशक्तताग्रस्त व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए कार्यरत अन्य शासकीय, अशासकीय, काॅर्पोरेट और अन्य सामुदायिक संस्थाओं के साथ लिंकेज तथा नेटवर्क के ब्यौरा का रख-रखाव करना ।

हितग्राहियों की पात्रता:

  • राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 अंतर्गत समाहित निःशक्तता से ग्रस्त व्यक्ति( औटिज़्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और एकाधिक बहुनिःशक्तता के वयस्क )
  • निःशक्त व्यक्ति 18 वर्ष से अधिक आयु का हो।
  • निःशक्त व्यक्ति  गरीबी रेखा के नीचे की सूची में नामांकित हो
  • निराश्रित/अनाथ/परित्यक्त/निर्धन होने के कारण उन्हें संरक्षण की आवश्यकता हो।
  • छत्तीसगढ़ राज्य का मूल निवासी हो ।
  • संस्था में प्रवेश स्वयं निःशक्त व्यक्ति /अभिभावक द्वारा आवेदन प्रस्तुत किए जाने पर प्रवेश दिया जा सकता है किन्तु इसके एक माह के भीतर संस्था द्वारा जिला स्तरीय समिति से अनुमोदन प्राप्त किया जाना अनिवार्य होगा ।
  • स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा अनुशंसा ।
  • कलेक्टर अथवा संयुक्त /उप संचालक जिला कार्यालय समाज कल्याण की अनुशंसा ।

आवश्यक दस्तावेज़ :

  • निःशक्तता प्रमाण पत्र की छाया प्रति
  • जन्म प्रमाण पत्र
  • निर्धारित प्रारूप में पूर्णतया भरा हुआ आवेदन पत्र
  • सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया छत्तीसगढ़ राज्य का मूल निवास प्रमाण पत्र
  • माता पिता अथवा विधिक अभिभावक का आय प्रमाण पत्र एवं पहचान पत्र
  • संस्था में प्रवेश स्वयं निःशक्त व्यक्ति /अभिभावक द्वारा आवेदन प्रस्तुत किए जाने पर प्रवेश दिया जा सकता है किन्तु इसके एक माह के भीतर संस्था द्वारा जिला स्तरीय समिति(लोकल लेवल कमिटी )से अनुमोदन प्राप्त किया जाना अनिवार्य होगा ।
  • रंगीन फोटो पासपोर्ट साइज़ नवीनतम ।
  • आधार कार्ड की छायाप्रति ।
  • बैंक खाता संबंधी विवरण ।
  • यदि निःशक्त व्यक्ति लावारिस हो या संकटग्रस्त परिवार से हो तो स्वैच्छिक संस्था को उसके प्रमाणन के लिए कलेक्टर /अपर कलेक्टर अथवा संयुक्त /उप संचालक , जिला कार्यालय ,समाज कल्याण से एसएमपीआरके करना चाहिए । इस स्थिति में अन्य किसी दस्तावेज़ की आवश्यकता नहीं होगी।
  • सम्पूर्ण राज्य में स्वैच्छिक संस्था के माध्यम से अधोसरंचना की स्थापना में मदद करना, ताकि देख-भाल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

* घरौंदा केन्द्र के किसी एक बैच में न्यूनतम 20 व अधिकतम 25 निःशक्त व्यक्ति हो सकते है। किसी घरौंदा केन्द्र में 25 निःशक्तों की सीमा अधिक हो जाने के बाद घरौंदा गृह को और निःशक्तों को प्रवेश देने की अनुमति नहीं होगी। यदि नए घरौंदा गृह के लिए पर्याप्त संख्या में निःशक्त हों तो पुनः नियमानुसार पृथक गृह संचालन करने हेतु आवेदन करना अनिवार्य है।*

घरौंदा गृह का संचालन कौन करेगा :

  • विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त स्वैच्छिक संस्थाएँ
  • नगरीय निकाय
  • राज्य शासन द्वारा स्वायत्त शासी /अधीनस्थ निकाय के रूप में गठित संस्थाएँ एवं संगठन
  • शासकीय मान्यता प्राप्त शैक्षिक संस्थान ,दानार्थ अस्पताल /न्नर्सिंग होम ,नेहरू युवा केंद्र ।

अधिक जानकारी हेतु यहाँ पढ़ें :

https://sw.cg.gov.in/sites/default/files/nirdesh-gharonda.pdf

साभार : http://thenationaltrust.gov.in/contenthi/scheme/gharaundahi.php

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