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दीनदयाल विकलांग पुनर्वास कार्यक्रम

दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना

दीनदयाल विकलांग पुनर्वास कार्यक्रम (DDRS) एक केंद्रीय योजना है जिसकी शुरुआत  वर्ष 1999 में हुई जिसके लाभार्थी सभी दिव्यांग जन होंगे। 

इसका उद्देश्य विकलांग व्यक्तियों को समान अवसर, समानता, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना है। यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा शुरू की गई और केंद्र द्वारा वित्त पोषित योजना है।

1 अप्रैल 2018 को दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना का संशोधन किया गया।योजना के अंतर्गत सरकार दिव्यंगों के लिए शिक्षा, पुनर्वास व अन्य कार्य करने वाले स्वसहायता समूहों (NGO) को धनराशि प्रदान करती है।

दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना की जागरूकता के लिए समय-समय पर सम्मेलनों का आयोजन भी किया जाता है।

सभी पंजीकृत संगठन और संस्थाएं योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र हैं। उपयोगकर्ता राज्य सरकार, राज्य आयुक्तों, राष्ट्रीय संस्थाओं या सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा नामित संगठनों से संपर्क कर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री की विकलांग योजना के तहत कार्य करने के लिए स्वसहायता समूह कम से कम 2 वर्ष से कार्यरत हो। NGO की वित्तीय स्थिति मजबूत होनी चाहिए। संगठन के पास कार्यक्रम चलाने के लिए सुविधायें और अनुभव होना आवश्यक है।

दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना का उद्देश्य : 

  • निःशक्तता की शीघ्र पहचान।
  • उपचारात्मक सेवाओं में सहयोग।
  • कृत्रिम अंग/सहायक उपरकण का प्रदाय एवं रखरखाव
  • सहायता हेतु प्रक्रियात्मक सहयोग।
  • निःशक्तजनों की शिक्षा हेतु सहयोग।
  • निःशक्तजनों के लिए बाधारहित वातावरण हेतु प्रयास।
  • समुदाय में निःशक्तजनों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • सामथ्र्य प्रदर्शन हेतु कार्यक्रम आयोजित करना।
  • विभिन्न स्तरों पर विभिन्न विभागों से समन्वय।
  • निःशक्तजनों के पुनर्वास हेतु विभिन्न व्यवस्थाएं।

मिलने वाले लाभ :-

  • निःशक्त व्यक्तियों को ग्रामीण स्तर पर विकलांग मितान के सहयोग से शिक्षण/प्रशिक्षण एवं पुनर्वास हेतु विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं से लाभान्वित करना।
  • Deendayal Viklang Punarvas Yojana के लिए 90 प्रतिशत तक का अनुदान केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता है।
  • केंद्र सरकार दिन्यांगों को हर जरूरी सुविधा देने के लिए राज्य सरकारों और जिला अधिकारियों की मदद से फंड को  स्वसहायता समूहों (NGO) तक पहुंचाती हैं।
  • दिव्यांगों के कल्याण हेतु हर वर्ष 600 से भी ज्यादा स्वसहायता समूहों (NGO) के लिए अनुदान दिया जाता है।
  • स्वसहायता समूहों (NGO) द्वारा विकलांगों को अच्छी शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सम्बंधित सुविधा भी प्रदान की जाती है।
  • आस-पास के क्षेत्र में विकलांगों की पहचान कर उन्हें सुविध दी जाती है और सरकार के समक्ष डाटा एकत्रित कर पेश किया जाता है।
  • व्यवसाय और नौकरी के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं, इसके लिए उन्हें लोन भी मुहैया करवाया जाता है।
  • प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, तूफ़ान में फंसे विकलांगों को सुरक्षित निकालना।
  • बस, ट्रेन टिकट की व्यवस्था करवाना।
  • दिव्यांग के परिवार को सही सलाह देना, जैसी आदि सुविधा NGO द्वारा दी जाती है।
  • हर वर्ष 35 हजार से 40 हजार  से अधिक लाभार्थियों को इन सेवाओं का लाभ दिया जाता है।

चयन प्रक्रिया :-

  • प्रमाणित निःशक्त व्यक्तियों को विभिन्न विभागों की योजनाओं से लाभान्वित करने हेतु विकलांग मितान/बहुउद्देशीय पुनर्वास कार्यकर्ताओं के माध्यम से कार्यवाही की जाती है।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा विभिन्न संस्थानों का क्रियान्वयन किया जा रहा है जिसकी जानकारी निम्नलिखित लिंक से प्राप्त की जा सकती है :

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ,सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय,भारत सरकार 

 

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